Tuesday, April 15, 2008

साईं © आस्था

रेडिफ़ से गुजरते हुए मैं साईं दर्शन के वीडियो पर पहुँच गया. वीडियो पूरा देखा. अंत में लिखा था © आस्था. इस बात ने सबसे ज्यादा मुझे हैरान किया कि यहां कॉपीराइट वाली क्या बात हो गई. सार्वजनिक रूप से मंदिर में आरती हो रही है, भजन चल रहे हैं उसे आपने फिल्मा लिया और उस चेप दिया © आस्था. यह तो तमाशा हो गया. जो चीज सार्वजनिक है या यूँ कहें कि जिस व्यक्ति ने अपना पूरा जीवन लोगों के लिए लगा दिया, लोगों को आदमी बनने के उपदेश दिए, जैसा कि लाखों-करोडों लोग मानते हैं, उसी के लिए सार्वजनिक रूप से हो रही आरती को आस्था चैनल ने कॉपीराइट के दायरे में ला दिया.

यूँ इसमें कोई आश्चर्य की बात होनी भी नहीं चाहिए क्योंकि धर्म से जुड़े मामलों पर कॉपीराइट का कब्जा बहुत दिनों से है. वैसे हमारे यहां चलन है, हर धर्म में चलन है ...हम धर्म को धंधे में बदल देते हैं और कुछ लोगों की बपौती में तब्दील कर देते हैं. कमोबेश सभी धर्म के कॉपीराइट कानून कॉफी सख्त रहे हैं!! कुछ जगह तो प्रयोग की भी छूट नहीं है - कौन वेद पढ़ सकता है कौन नहीं इसपर पूरी संहिताएं हैं. फिर भी पता नहीं क्यों © संकेत साईं की वीडियो पर देखकर अजीब सा लगा और लगा इसे नहीं होना चाहिए था. अरे आप यह लिख देते - आस्था की ओर से...लेकिन कॉपीराइट लिखने के बड़े खास मायने होते हैं और आप नाहक साईं के भक्तों के साईं को दूसरों को दिखाने से रोक रहे हैं. साईं न हो गए सॉफ्टवेयर के प्रोग्राम हो गए...लीजिए आजकल सॉफ्टवेयर भी क्रियेटिव कॉमन्स के तहत जारी हो रहे हैं लेकिन आस्था वालों की दुस्साहस ही हम कहेंगे कि उन्होंने साईं के भजन की वीडियो बनाई और उसका कॉपीराइट जारी कर दिया. मुझे याद नहीं कि गीताप्रेस गोरखपुर की किताबों में यह कॉपीराइट घोषणा कैसे रहती है. वैसे क्या यह रोचक नहीं होगा कि इन चीजों पर शोध किया जाए :D.

2 comments:

अतुल said...

अब तो भगवान भी किसी के कापीराईट हो गये हैं.

Vivek said...

और अब शिरडी मन्दिर भगवान की पूजा करने पर रॅयल्टी वसूलने वाली है...

http://www.bhaskar.com/2008/04/18/0804180920_saibaba.ह्त्म्ल

भगवान की पूजा करने के लिए पैसे देने पड़ेंगे...सोच नही था कभी...!