Wednesday, September 24, 2008

फ़ॉयरफ़ॉक्स 3 .0. 2 हिंदी बीटा जारी

फ़ॉयरफ़ॉक्स हिंदी बीटा
को रिलीज किया जा चुका है...कृपया जाँचें और बताएँ। हम उन सभी के लिए आभारी हैं जिन्होंने इसकी जाँच में सहयोग किया था और अपनी प्रतिक्रिया पिछले ब्लॉगों पर भेजी थी। यहाँ हम सराय के ट्रांसलेशन रिव्यू वर्कशॉप और उसमें भाग लेने वाले सभी लोगों का जिक्र करना जरूर चाहेंगे जिसकी वजह से यह बेहतर रूप में आ पाया है। इसमें फ्यूल लिस्ट का भी उपयोग किया गया है। शुक्रिया श्री रमण व उनकी टीम का भी जिन्होंने इसमें महत्वपूर्ण सहयोग दिया है।

Monday, September 22, 2008

एक हिंदी विद्यालय की मौत

शायद नेतरहाट हिंदी माध्यम का सबसे बढ़िया विद्यालय होगा, या हम जैसों की नजर से देखें जिसने उसमें पढ़ाई की है, तो उस जैसा स्कूल हो ही नहीं सकता है. परंतु गत हफ्ते टेलिग्राफ में छपे समाचार ने जो सदमा दिया है उससे उबर नहीं पा रहा हूँ. विद्यालय को पब्लिक स्कूल बनाने की प्रबंधन की कोशिश में न सिर्फ आधारढ़ांचे में बदलाव किया जा रहा है परंतु जो बदलाव होने जा रहे हैं उसमें यह भी शामिल है कि पढ़ाई लिखाई का माध्यम हिंदी से अंग्रेजी कर दिया जाए. जो भी बिहार-झारखंड से हैं वे बखूबी जानते हैं कि उस स्कूल ने शैक्षणिक गुणवत्ता की दृष्टि से वह सारी सफलता हासिल की जो कोई विद्यालय सोच भी नहीं सकता है. समाचार में कहा गया है कि यह नेतरहाट के खोए गौरव को पाने की कोशिश है. क्या किसी विद्यालय के गौरव में कमी उसके माध्यम से ही जोड़ी जा सकती है....क्या यह कोई दूसरी प्रबंधनीय असफलता नहीं है जिसकी ओर से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है. क्या यह कोई और राजनीति है...क्या यह राष्ट्रविरोधी नहीं है कि एक सरकारी खर्चे से फलने फूलने वाला विद्यालय अंग्रेजी भाषा में पढ़ाई करवाने के लिए करोड़ों रूपए खर्च करे. मुझे यह भी समझ में नहीं आता है कि इतने सारे अंग्रेजी के कान्वेंट व पब्लिक स्कूलों के बीच नेतरहाट अंग्रेजी में माध्यम रख कर ही क्या हासिल कर लेगा? संभवतः कुछ भी नहीं. जो भी गौरव बचा है उसे भी हम नष्ट कर देंगे. जब भी हम किसी की नक़ल करते हैं उसी वक्त हम उन अनोखेपन को खो देते हैं जिसकी बदौलत हमारा बजूद हुआ करता है. नेतरहाट या उसके वर्तमान प्राचार्य श्रीमानजी...क्षमा करेंगे...सर, श्री...पुनः क्षमा करेंगे मि. विनोद कुमार कर्ण और विद्यालय...माफ़ी...स्कूल की मैनेजमेंट संभवतः अपना निजी हित तो हासिल कर सकती है, लेकिन लोगों का कितना भला होगा यह तो कोई भी समझ सकता . आएँ एक हिंदी विद्यालय की मौत पर शोक मनाएँ.

Friday, September 19, 2008

पहले इंटरनेटी लोकार्पण में शरीक हों

सॉफ़्टवेयर फ्रीडम डे और हिन्दी पखवाड़ा के अवसर पर आप सब हिन्दी वेब पत्रिका

www.literatureindia.com/hindi/

के लोकार्पण कार्यक्रम में सादर आमंत्रित हैं.

कवि श्री नीलाभ लोकार्पण व अध्यक्षता करेंगे

बीज वक्तव्य इतिहासकार श्री रविकान्त का होगा.

इस अवसर पर कवि श्री मोहन राणा अपनी कविता पाठ के साथ संक्षिप्त वक्तव्य देंगे.

संचालन व्यंग्यकार व तकनीकी अनुवादक श्री रवि रतलामी करेंगे.

स्थान: सर्वर irc.freenode.net चैनल #sarai
दिनांक: 20 सितंबर 2008 शनिवार
समय: 04 बजे अपराह्न (भारतीय समयानुसार)

irc पर जुड़ने के लिए इस ब्लॉग की मदद आप लें : http://raviratlami.blogspot.com/2008/09/blog-post_19.हटमल

इस ब्लॉग के शीर्षक को मैंने रवि भाई से चुराया है...

Sunday, August 31, 2008

'पानी के आदमियों जैसे हजार-हजार सर' और कौसिकी की धार

कोसी इलाके का हूँ शायद इसलिए परेशान ज्यादा हूँ...जाने पहचाने चेहरों, गलियों, सड़कों का दर्द, उनसे जुड़ी पीड़ा शायद ज्यादा सीधी लगती है. पुणे में रहकर क्या करूँ...न्यूज़ जिस वक्त खोज रहा था उस समय चैनलों के अपने धंधे चल रहे थे. फोन पर हर अपनों से पूछते-पूछते परेशान था कि क्या कर रहे हैं...क्या हालत है. अब तो चैनलों की टीआरपी को भी यह ख़बर अब रास आ रही है. बस ज्यादा कुछ बकबक करने की इच्छा नहीं हो रही है. बस, इस दुख की घड़ी में कुछ कविताएँ याद आ रही हैं...

"पत्थरों पर पानी सर सर फोड़ता था
पानी के आदमियों जैसे हजार-हजार सर
और धुंध में जमता झाग
रात में चमकता हुआ"
- मंगलेश डबराल

"पानी में दिखता है कभी तेज बहाव में
छटपटाता हुआ कोई
बेमानी मगर उसकी छटपटाहट बिलकुल निरूपाय
कि बचाने की पुरानी रिवायत खत्म हो चुकी"
-पंकज सिंह

सचमुच 'बचाने की पुरानी रिवायत खत्म हो चुकी है' और विष्णु खरे की उधार लें तो लगता है कि "बादल और नदियाँ सूरज, हवा और घरती से मिलकर अपना निर्मम और व्यापक बदला लेते हैं." अंत में कौसिकी के धार में पले बढ़े नागार्जुन की सुनें:

गाछी सुखा गेल
कलमबाग नष्ट भेल
उजड़ल देहात
बिगड़ल बसात
लोकवेद बेहाल
पड़ल अकाल
मुइल माल-जाल
कतहु रहल ने शेष
आरि धुरक ने रेख
लै गेल बहाय सभक
खेत औ' पथार
कौसिकीक धार !

Friday, August 15, 2008

Translation and the Concept of Register

Basically in modern linguistics, language is analyzed on two basis, on the basis of structure and on the basis of usability. According to the variation of subjects language variation is essential. We can say it domain variation or functional variation. These variation is the variation of domain that is functional variation according to subject matter. On the basis of usability, the special language type which we use is called register. Linguistics have tried to capture these functional variations of the homogeneous code by introducing the concept of register or domain. The notion of register is based on the social fact – what people do with their language. In other words, it is a language variety used in social activity in a defined situation.

On the basis of register only we can differentiate between the functionality of language in different human practice. Basically to understand the speciality the concept of register came in linguistics. When we make differences in same language according to particular subject area then register is created. Due to the use only official Hindi is different from commercial Hindi, commercial Hindi is different from technical Hindi and technical Hindi is different from social Hindi and so on. All area have its own particular words and use. The glossaries and use of language in all areas are different. The identification of this difference is essential. We can see the difference in the following examples.

At the level of words:

Administration Scientific
Grant Force
Registration Velocity
Document Displacement
Confidential Magnetism
Compensation Photosynthesis

Thursday, August 14, 2008

टिंडरबॉक्स से अग्निलूमड़


फ़ायरफ़ॉक्स उर्फ अग्निलूमड़ की जाँच सीधे टिंडरबॉक्स से करें. आप अपना नवीनतम हिन्दी बिल्ड सीधे यहीं से ले सकते हैं...अपने मनपसंद प्लेटफ़ॉर्म के अनुसार. लगातार पकते हुए खाने का अगर आप आनंद लेना चाहते हैं तो टिंडरबॉक्स पन्ने पर जाएँ. यदि नाइटली बिल्ड चाहिए तो यहाँ से लीजिए. इस सबके साथ मोज़िला डैशबोर्ड पर अपनी भाषा को दूसरी भाषा के साथ देखें. कुछ दिक्कत हो तो हमें खबर देना न भूलें. हाँ...अगर सबकुछ 'कुशल' रहा तो यह अधिकृत अनुवाद में शामिल होगा :-)...
लेकिन अभी 15-20 दिन शेष हैं.

अंत में आप सबका बहुत बहुत शुक्रिया...रवि रतलामी, देबाशीष, जय, शैलेश भारतवासी, आलोक, अनुनाद सिंह, संजय बेंगाणी, प्रतिभा जैसे तमाम लोगों का...! कुछ और कारसेवकों का इंतजार है...

Monday, August 11, 2008

Test Firefox3.0.2 Hindi

Firefox 3.x Hindi is in the process of release and its builds from different platforms are ready to test. Please test it by downloading from here... Its fresh and incorporating some changes that I got on the comment of my earler post. I am unable to do some of the changes as it will violate Fuel Hindi I am sorry for this but anybody thinks it wrong or want it to improve they can create an issue there at Fuel page.

Firefox 3.0.2 Hindi is available for linux, mac, and windows platform. So please try to test it for more platform if you have with you. I got several report at my earlier post and I am thankful to all.