Tuesday, February 22, 2011

मैथिलीमे फायरफाक्स

आज इंटरनेट खंगालने वाला हर तीसरा आदमी अमूनन फ़ायरफ़ॉक्स का उपयोग करता है। भारत की कुछ भाषाओं में यह ब्राउज़र उपलब्ध है। यह लोकप्रिय वेब ब्राउज़र फ़ायरफ़ॉक्स अब मैथिली में तैयार है और बीटा रिलीज में उपलब्ध है। हमलोगों कुछ वर्ष पहले मैथिली में पूरा का पूरा कंप्यूटर तैयार करने की आकांक्षा पाली थी और खुशी है कि हम इसे पूरा कर पा रहे हैं। फ़ायरफ़ॉक्स मैथिली का उपयोग करें और बताएँ कि कहाँ-कहाँ हम इसे सुधार सकते हैं।

फ़ायरफ़ॉक्स बेहद लोकप्रिय है। उम्मीद है कि मैथिली जानने वाले लोग हमें अपने सुझावों के रूप में योगदान देंगे। गौरतलब है कि हम पहले ही फेडोरा, गनोम, केडीई जैसे मुक्त स्रोत सॉफ़्टवेयरों को मैथिली में ला चुके हैं।



यहाँ से अपने सिस्टम के मुताबिक डाउनलोड करें।

Thursday, February 17, 2011

भोजपुरी कंप्यूटर?

भोजपुरी लोक की भाषा है...लोकप्रिय है और इसलिए आसानी से हमारे साथ घुल-मिल जाती है और करीब लगती है। भोजपुरी में चैनल आ गए हैं। कई संस्थानों ने इसके लिए अपने यहाँ विशेष अध्ययन के केंद्र खोल रखे हैं। कुछ साइटें भी आ गई हैं। लेकिन इस डिजिटल दुनिया में क्या ही अच्छा होता अगर हम भोजपुरी में भी कंप्यूटर देख पाते। ज्यादा मुश्लिक नहीं है। भोजपुरी भाषा के दो-तीन लोगों को आगे आना होगा। आपकी थोड़ी मिहनत से भोजपुरी कंप्यूटर तैयार हो जाएगा। और जो भी तकनीकी समस्या होगी उसे निपटाने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद हैं। अगर भोजपुरी कंप्यूटर के प्रोजेक्ट को कोआर्डिनेट करना चाहते हैं, कोआर्डिनेटर बनना चाहते हैं तो हमें ईमेल कीजिए। एक ऐतिहासिक कार्य...

Friday, February 11, 2011

फ़ायरफ़ॉक्स 4 बीटा हिन्दी में...

फ़ायरफ़ॉक्स 4 बीटा हिन्दी में भी है और हिन्दी में फ़ायरफ़ॉक्स को बेहतर बनाने के लिए जरूरत है आपके सहयोग की। हाँ आपका सहयोग क्योंकि यह समुदाय के बलबूते चलने वाला सॉफ़्टवेयर है और सामुदायिक समर्थन से अपने को आगे बढ़ाते हुए आज इंटरनेट उपयोग करने वालों का एक चौथाई हिस्सा आज फ़ायरफ़ॉक्स के द्वारा दुनिया को देखता है। यानी इंटरनेट चलाने के लिए फ़ायरफ़ॉक्स को बतौर ब्राउज़र को इस्तेमाल करता है। फिर क्या देर है...आज ही इसे बीटा को अपने कंप्यूटर पर लगाएँ और विस्तार से मुझे ईमेल पर या इस ब्लॉग पर टिप्पणी के रूप में भेजिए कहाँ गलती है। आप अनुवाद संबंधी, तकनीकी या किसी भी समस्या के लिए लिख सकते हैं। आप डाउनलोड यहाँ से कर सकते हैं —

विंडोज़
लिनक्स
मैक

इसकी समीक्षा कार्यशाला सराय में हुई थी और इसके अनुवाद में फ़्यूल शब्दावली का उपयोग किया गया है। इसे मोज़िल्ला के लिए काम करने वाले हिन्दी समुदाय के द्वारा तैयार किया गया है।

Thursday, February 10, 2011

कंप्यूटर व तकनीकी अनुवाद के लिए हिन्दी की स्टाइल व परिपाटी गाइड

पिछले कई वर्षों से लोकलाइजेशन क्षेत्र में रहने के कारण मेरी इच्छा एक स्टाइल गाइड तैयार करने की रही जो कि तकनीकी अनुवाद के लिए उपयोग में आए और सार्वजनिक रूप से लोगों के उपयोग के लिए उपलब्ध भी रहे। पिछले लगभग तीन वर्षों से फ़्यूल प्रोजेक्ट के लिए बतौर कोआर्डिनेटर काम करते हुए लगा कि महज शब्दावलियों के स्तर पर काम करके अनूदित पाठ में एक प्रकार की 'स्थिरता' नहीं लायी जा सकती है जिसकी दरकार खासकर तकनीकी अनुवाद के क्षेत्र में बेहद जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए मैंने हिन्दी में स्टाइल गाइड बनाने का जिम्मा लिया और इसके बीटा को परसों सार्वजनिक उपयोग और टिप्पणी या सुझाव आदि प्राप्त करने की दृष्टि से जारी किया। कंप्यूटर ट्रांसलेशन स्टाइल एंड कनवेंशन गाइड नामक यह पुस्तिका संभवतः हिन्दी में तकनीकी अंतर्वस्तु की कमी को थोड़ा सा पाटने की कोशिश करेगी, ऐसा मैं समझता हूँ। इसे अंग्रेजी में तैयार करने के कुछ कारणों में यह भी है कि बहुत सारे i18n इंजीनियर समुदाय के रूप में बाहर यानी दूसरे देशों में भी काम करते हैं और यह गाइड इस रूप में उनके लिए भी मददगार होगी। यह क्रियेटिव कॉमन्स लाइसेंस के अंतर्गत जारी किया गया है।

आप यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं :

ओडीटी प्रारूप
पीडीएफ प्रारूप

जाने-माने चिट्ठाकार रवि रतलामीजी ने इसके बारे में अपने ब्लॉग पर लिखा भी है और नेट पर बतौर पीडीएफ ईबुक एम्बेड भी किया है।

आपकी प्रतिक्रिया काफी जरूरी होगी। कृपया पूरा पढ़ें और बताएँ कि मैं इसे अपने हिन्दी समुदाय के लोगों के साथ मिलकर किस प्रकार बेहतर बना सकता हूँ।

Thursday, December 2, 2010

बिहार में शकीरा

बिहार के जमालपुर में शकीरा का डांस होनेवाला था, और मेरे थोड़े जवान चाचा-चाची और भाइयों ने सुबह से ही तैयारी चालू कर दी थी. उत्सव का माहौल. क्या कहने! परंतु जब सही समय आया तो मैं ज्यादा देख नहीं पाया. कुछ शोर-गुल ही इतना था, और देखने वाले भी काफी हुड़दंग मचा रहे थे. फिर भी लगा कि लोग मस्त थे. गोरी चमड़ी को नजदीक से देखने का लुत्फ कुछ अलग ही दिख रहा था सबके चेहरे से. मेरा बेटा भी मेरे साथ था. शकीरा जमालपुर से ट्रेन पकड़ रही है. साली ट्रेन काफी टूटी-फूटी है. मैं काफी शर्मिंदा हो रहा हूँ कि क्या हाल कर रखा है. भारत और खासकर फिर बिहार की तो फजीहत हो गई.

लेकिन उसी बीच बीबी की प्यार भरी आवाज सुनाई दी, आज चाय आप ही बनाएँ. शकीरा और संगीता. कुछ मैच नहीं किया. मैंने कहा, "धत्त तेरे की, क्या किया आपने. अभी शकीरा की नाच देख रहा था." नींद खोलने की कोशिश करते बीवी ने कहा कि आज तो लाइफ बन गई. सोना सफल हो गया होगा. अब चाय तो बनाइए. उठा. चाय चूल्हे पर चढ़ा दिया. यह भी गजब की बात है कि आला दर्जे का भाग्यवादी होने के बावजूद मैं कार्य-कारण की बिना सोचे रह नहीं पाता. सोचने लगा कि पता नहीं क्यों शकीरा का सपना देखा. कोई दूसरा सपना देखता तो शायद दूसरे पल ही दिमाग से निकाल देता, लेकिन शकीरा को और वह भी बिहार में नाचती हुई!

सोचने लगा तो मुझे लगा कि कई कारण हो सकते हैं. इधर कुछ दिन पहले ही बिग बॉस में श्वेता तिवारी से मनोज तिवारी शकीरा के लटके-झटके के बारे में अपना जनरल नॉलेज बढ़ा रहे थे. शायद इसका असर हो. फिर ध्यान आया कि कल ही तो मोज़िल्ला मीट का एक वीडियो फेसबुक पर देखा था. श्रीलंका के दनिश्का ने लगाया था. उस वीडियो में वह कन्या भी थी जो मुझे कनाडा में उस कॉन्फरेंस में मिली थी और देश पूछने पर छूटते ही बताया था कि वह कोलंबिया की है...वही कोलंबिया जहाँ की शकीरा है. मैंने कहा भी था हाँ हाँ वही कोलंबिया न जहाँ के मार्केज़ हैं. वह बोली थी - हाँ, हाँ वो भी हैं. मुझे दुख भी हुआ था कि वह अगर मार्केज़ बताती तो और अच्छा लगता. मार्केज़ का भी तो कल या परसों ही तो इंटरव्यू पढ़ा था अपने प्रभातजी के खूबसूरत अनुवाद में. शायद यही गुत्थी हो. फिर लगा कि लगता है कि सपने में शकीरा कुछ नहीं, बस मेरी सठियाती जवानी की 'बेहूदी' ख्वाहिश हो सकती है. और कुछ नहीं. फिर याद आया कि आजकल मेरी 'टपोरी' बीवी गाना गुनगुनाते रहती है, शकीरा से भी ज्यादा तेरी हिले नथुनी...शायद कुछ इसी कारण शकीरा को हिलते देखने की इच्छा हो गई होगी.

लेकिन पता नहीं क्यों कोई कारण मुझे कनविंस नहीं कर पा रहा था. हमलोग पीते हैं लप्चू चाय. उसे बनाकर कुछ देर तक के लिए ढक दिया था पत्ती के फूलने के लिए ताकि महक बढ़िया आए. ये कारण तो मुझे ठीक लग रहे थे, सिर्फ एक कोण था जो समझ में नहीं आ रहा था कि शकीरा पुणे आ सकती थी, मुंबई आ सकती थी, वह बिहार क्यों गई...जमालपुर. एकाएक अविनाशजी की फेसबुक की टिप्पणी याद आने लगी, "बिहारवाद बबुआ धीरे-धीरे आयी... नीतीशवा से आयी, सुशीलवा से आयी... बिहारवाद बबुआ हौले-हौले आयी...". तो क्या मेरे दिमाग में भी बिहारवाद जोर मारने लगा है. कहीं मैं यहाँ पुणे में रहते इतना त्रस्त तो नहीं हो गया हूँ
कि लगा कि बिहार को एकाएक विकसित बना देने का एक ही तरीका बचा है कि शकीरा को बिहार में नचाया जाए थोड़ी ठेठ जगह पर. या फिर नीतीश बाबू के परिणाम से इतना स्तब्धकारी आह्लाद में आ गया हूँ कि लगा कि नीतीशजी ने लोकतंत्र की विजय के आनंद में चार चाँद लगाने के लिए शकीरा को बिहार में नाचने के लिए आमंत्रित किया है. वैसे इससे पहले के जो तथाकथित प्रकार के नाच थे वो "राणाजी मुझको माफ करना" टाइप के थे और उसका मजा आम लोग नहीं ले पाए थे. इस तथाकथित नाच की चर्चा आज भी गली-गली में है और लोग बेहद दुखी हो जाते हैं यह सुनाते हुए कि कैसे 'बस कुछ लोगों' ने 'एक करोड़' की उस नाच का मजा लिया था.

मेरी बीवी बोली कि थोड़ी कम ही चीनी मिलाना. आज तो शकीरा भी थोड़ी सी चाय में मिल ही गई होगी. मैं समझ गया. चाय छानने लगा. लेकिन सपने दिमाग से जा नहीं रहे थे. सपने में मैं 'अग्निलोमड़' ममता बनर्जी को गलियाँ दे रहा था कि उसने बिहार की इज्जत मिट्टी में मिला दी. जानबूझकर उसने ऐसी ट्रेन दी होगी. शकीरा को कितनी दिक्कत हो रही होगी उस ट्रेन में. किसी ने उधर से बोला था कि अब तो भागलपुर में मैकडोनाल्ड भी खुल गया है. और मेरा 'नालायक' बेटा जिद मचाने लगा कि वह मैकडोनाल्ड जाएगा. और मैं हमेशा की तरह बेटा की जिद के आगे झुक गया. और हमलोग भागलपुर की ओर चल पड़े.

Friday, November 26, 2010

फ़्यूल तेलुगु मीट काफी सफल रहा

फ़्यूल तेलुगु मीट काफी सफल रहा है. शायद पहली बार कंप्यूटर शब्दों के मानकीकरण की कोशिश की गई है तेलुगु में. अर्जुन, पवित्रण और कृष्णा जैसे लोगों ने इसके लिए काफी मशक्कत की और उसका परिणाम हमें काफी अच्छा मिला. अधिक जानकारी के लिए यहाँ देखें. आचार्य नागार्जुन विश्वविद्यालय में हुए इस मीट के कुछ फोटो साझा कर रहा हूँ.
 इसमें विश्वविद्यालय के कई प्रोफेसरों और छात्रों ने हिस्सा लिया. दो दिनों तक काफी चर्चा और सलाह मशविरे के बाद फ्यूल शब्दावली की सूची तैयार की गई. खास बात यह है कि इसके बाद तेलुगु कंप्यूटरी में लगे लोग इसका इस्तेमाल अपने अनुवाद आदि कार्यों में करेंगे जिससे कि एक स्तर पर मानकीकृत शब्दावली का उपयोग हो पाए.
इसमें भाग लेने वालों में कुछ महत्वपूर्ण चेहरे हैं- डा. एम. सत्यनारायण, डा. पी वाराप्रसाद, डा. माधवी, डा. ई प्रभावती और डा. एन वी कृष्णा राव जहाँ तेलुगु के प्रोफेसर हैं वहीं डा. के. सत्यनारायण संस्कृत के प्रोफेसर हैं. पवित्रण इंडलिनक्स से जुड़े हैं और अर्जुनराव विकीपीडिया से. कृष्णा ने तेलुगु लोकलाइजेशन के काम में अनुवाद के माध्यम से सर्वाधिक योगदान दिया है. सबका शुक्रिया और सभी को मेरी बधाई.

Tuesday, November 23, 2010

फ़ायरफ़ॉक्स 4 के लिए काम चालू - अपना सुझाव भेजें

अनुवाद एक जटिल काम होता है...और मेरा तो मानना है कि अनुवाद के काम में फ़ीडबैक की कुछ अधिक ही जरूरत होती है. फ़ायरफ़ॉक्स का उपयोग काफी होता है और इसे खासकर हिन्दी में काफी डाउनलोड भी किया जाता है. फ़ायरफ़ॉक्स 4 के लिए काम चालू हो गया है. इसलिए जो कोई फ़ायरफ़ॉक्स हिन्दी या मैथिली में उपयोग कर रहे हैं, उनसे अनुरोध है कि वे हमें अपनी प्रतिक्रिया भाषाई समस्या या सुधार के परिप्रेक्ष्य में मुझे भेजें. मैं आपकी प्रतिक्रिया के आधार पर उसे सुधारने की कोशिश करूँगा. स्क्रीनशॉट के साथ अगर संदेश भेजें जिसमें समस्या है और साथ ही सुझाव भी दिए गए हों तो क्या कहने. आप मुझे सीधे ईमेल भी जीमेल के इस आईडी पर कर सकते हैं - rajesh672. यदि कोई तकनीकी समस्या है तो हमें तो भेज सकते हैं लेकिन बेहतर होगा कि वहाँ पर सीधे इस संबंध में बग फ़ाइल करें.