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Thursday, January 8, 2015

'छोटी-छोटी' भाषाओं के बड़े सपनों के पूरे होने की कहानी*

आदरणीय नरेन्द्र यादवजी, पंडित गोविन्द झाजी, प्रो. अजय कुमार झाजी और उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत करते हुए मुझे अपार खुशी हो रही है। आप सबका हार्दिक स्वागत है। आपकी इस कार्यक्रम में शिरकत हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण है। आपने अपना कीमती समय निकाला और यहाँ इस कार्यक्रम में आए - इसके लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया।

फ़ायरफ़ॉक्स फ़ॉर मोबाइल यानी फ़ेनेक
जैसा कि आप जानते हैं ऐंड्रायड मोबाइल के लिए फ़ायरफ़ॉक्स अब मैथिली में भी उपलब्ध है और हम इसी के लिए यहाँ इकट्ठा हुए हैं। ऐंड्रायड मोबाइलों के लिए फ़ायरफ़ॉक्स ब्राउज़र मोज़िला फ़ायरफ़ॉक्स के वेब ब्राउज़र का एक विशेष बिल्ड है जो स्मार्टफ़ोन और टैब्लेट कंप्यूटर जैसे उपकरणों पर उपयोग किया जा सकता है। मैथिली भाषा में मोबाइल के लिए फ़ायरफ़ॉक्स ब्राउज़र का रिलीज होना काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मोबाइल (एंड्रायड आधारित फोन) पर पहला ब्राउज़र है जो मैथिली में उपलब्ध है।

ऐंड्रायड मोबाइल के लिए फ़ायरफ़ॉक्स की मैथिली में उपलब्धता की  खुशी को हमने मोज़िला की मदद से आप सब लोगों साथ साझा करने की कोशिश की है। मोबाइल के लिए फ़ायरफ़ॉक्स की मैथिली में उपलब्धता के सामुदायिक लॉन्च का यह छोटा-सा कार्यक्रम वास्तव में भाषा घर ( www.bhashaghar.in )  समूह के अंतर्गत काम कर रहे कुछ जुनूनी लोगों की कोशिशों का उत्सव है। यह सामुदायिक प्रयास के सफलता की एक विशिष्ट कहानी है। ऐंड्रायड फ़ोन के लिए इस ब्राउज़र को यहाँ से डाउनलोड किया जा सकता है - ftp://ftp.mozilla.org/pub/mobile/releases/31.0/android/mai/. इसे डाउनलोड कर इसका आनंद लें।

एक तकनीकी बात – अब तक यह गूगल प्लेस्टोर में तकनीकी कारण (तीन वर्णीय लोकेल कोड की अनुपलब्धता) से उपलब्ध नहीं था। 05 जनवरी 2015 से यह गूगल प्ले स्टोर पर ऐंड्रायड 5 पर चलने वाले सभी डिवायसों पर उपलब्ध रहेगा।

मोज़िला के अन्य उत्पाद भी मैथिली में

ज्ञातव्य है कि मोज़िला फ़ायरफ़ॉक्स एक फ्री और ओपन सोर्स ब्राउज़र है जो लाखों स्वयंसेवी समुदाय की मदद से मोज़िला फ़ॉउंडेशन के द्वारा तैयार किया जाता है। फेनेक के अलावे फ़ायरफ़ॉक्स ब्राउज़र, फ़ायरफ़ॉक्स ओएस - मोबाइल का एक विशेष ऑपरेटिंग तंत्र – भी मैथिली में उपलब्ध है।

भाषा घर – 'छोटी-छोटी' भाषाओं के बड़े सपने
कंप्यूटर और संबंधित उपकरणों को मैथिली भाषा में करने का काम करीब छह साल पहले मैंने आरंभ किया था जिसमें बाद में कई लोग जुड़े। संगीता कुमारी ने आगे इसका ज़िम्मा लिया और राकेश रोशन, सदन झा, प्रतिभा कुमारी जैसे स्वयंसेवियों की मदद से अब पूरा का पूरा कंप्यूटर भी मैथिली में उपलब्ध है। अब फ़ेडोरा, गनोम, केडीई, लिब्रे ऑफिस, फ़ायरफ़ॉक्स के विभिन्न उत्पादों सहित कई सॉफ़्टवेयर पर काम यह स्वयंसेवी समूह कर रहा है। इस समूह को हमने बड़े उद्देश्यों के लिए भाषा घर नाम दिया और सोचा कि हम उन सभी भाषाओं पर काम करेंगे जिसके पास संसाधनों की कमी है। इसकी वेबसाइट bhashaghar.in है। हम अंगिका, मगही और भोजपुरी पर भी काम शुरू कर चुके हैं। मैं यहाँ अजय कुमार झाजी, गोविन्द झाजी, रमणजी, मोचीजी सहित कई लोगों को बहुत आभारी हूँ कि आरंभिक दिनों में मैथिली शब्दावली के निर्माण में इन्होंने हमारा भरपूर सहयोग किया था।

मरती भाषाओं का नक्शा बहुत डरावना लगता है
21 जनवरी 2008 को मैरी स्मिथ जोन्स की मृत्यु हो गयी थी। मेरी जोन्स की मृत्यु महज एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं कही जा सकती। वह दक्षिणी मध्य अलास्का की एयाक भाषा बोलने वाली अंतिम जीवित व्यक्ति थी। उनकी मौत के बाद एयाक भाषा बोलने वाला एक भी व्यक्ति नहीं बचा। और इस प्रकार सीमित भाषायी विविधता वाले मौजेक से एक रंग हमने खो दिया। शायद आपको जानकर आश्चर्य होगा कि अंगिका - हमारी ही एक भाषा - यूनेस्को के वैश्विक भाषायी मानचित्र पर एक मरती हुई भाषा की सूची में है। नक्शा देखकर काफी अजीब भी लगता है। विश्व एक-दूसरे से जुड़ता जा रहा है लेकिन भाषाएँ मरती जा रही हैं। अधिकाधिक देश लोकतांत्रिक हैं, विकास की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन क्या यह लोकतंत्र, यह विकास छोटी-मोटी भाषाओं की जिंदगी बचाकर नहीं रख सकती है? बहुवचनीयता आज ख़तरे में है। हमने अंगिका को कंप्यूटर पर लाने में आरंभिक सफलता पाई है। अंगिका लोकेल अब कंप्यूटर के लिए मौजूद है। अंगिका फ़ायरफ़ॉक्स के लिए हमने काम शुरू कर दिया है। इसके लिए शब्दावली निर्माण का काम फ़्यूल प्रोजेक्ट (fuelproject.org) के तहत होने जा रहा है। कंप्यूटर पर अंगिका की उपस्थिति शायद इसके वजूद को स्थायित्व प्रदान करे। यह 'छोटी-छोटी' भाषाओं के बड़े सपनों के पूरे होने की कहानी है। जरूरत हमें योगदानकर्ताओं की भी है जो आगे आए और महीने में से कुछ घंटे निकालें और और अपनी भाषा के लिए दें।

एक बार मैं फिर से आप सबका दिल से स्वागत करता हूँ। स्वागत और शुक्रिया।
*(मोबाइल के लिए फ़ायरफ़ॉक्स के मैथिली के सामुदायिक लोकार्पण के अवसर पर दिया गया स्वागत वक्तव्य)

Wednesday, November 11, 2009

मैथिली कंप्यूटर के जारी होने की ख़बर आउटलुक पर


मैथिली कंप्यूटर के रिलीज होने की ख़बर आउटलुक पर आई है...थोड़ी पुरानी हो गई है लेकिन हमारे पास वह अंक अभी हाल में ही आया है. गौरतलब है कि फेडोरा, जो कि लिनक्स का एक लोकप्रिय वितरण है, के साथ अब मैथिली भाषा भी समर्थित रूप में रिलीज हो रही है. यह वाकई मैथिली के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कई तथाकथित रूप से अधिक महत्वपूर्ण भाषाओं में अभी तक यह काम संभव नहीं हो पाया. कई तकनीकी समस्याओं से आगे बढ़ते हुए करीब दस लाख शब्दों के अनुवाद ने हमें सुकून तो जरूर दिया है कि हमने मैथिली भाषा के लिए कुछ कर पाया है. धन्यवाद के पात्र हैं इनसे जुड़े लोग खासकर संगीता, पराग, राकेश, अमन आदि. जाने माने पत्रकार और आउटलुक के संपादक नीलाभ जी का बहुत बहुत शुक्रिया.

Thursday, June 11, 2009

मैथिली भाषा में पूरा का पूरा कंप्यूटर जारी



फेडोरा 11 आ गया है और उसके साथ मैथिली भी आया है- पहली बार. पहली बार मैथिली भाषा में पूरा का पूरा डेस्कटॉप - संस्थापन से शुरू करके लगभग सारे अनुप्रयोगों को शामिल करते हुए. फेडोरा 11 में मैथिली के लिए विशेष रूप से तैयार लोहित फॉन्ट भी है. नए व तेज-तर्रार इनपुट विधि आईबस के प्रयोग से आप मैथिली में लिख सकते हैं. हमारे ब्लॉग में इसे रखने का एक बड़ा उद्देश्य यह है कि कुछ प्रयोक्ता जरूर इसे जाँचें और हमें सुझाव भेजें. हम यहाँ कुछ स्क्रीनशॉट रख रहे हैं. यहाँ फेडोरा के साथ दो डेस्कटॉप वातावरण उपलब्ध हैं - एक तो गनोम व दूसरा केडीई. दोनों को देखें. केडीई के कॉन्करर ब्राउजर का प्रयोग आप मैथिली में स्थानीयकृ ब्राउजर के रूप में कर सकते हैं. यहाँ फेडोरा में भारतीयओओ के द्वारा सुपुर्द किया गया ओपनऑफिस भी उपलब्ध है. इस तरह फेडोरा 11 में हर वह कुछ उपलब्ध है जो कि किसी एक डेस्कटॉप में सामान्य प्रयोक्ता को चाहिए होता है. इस सबके लिए दुनिया भर में काम कर रही समुदाय के साथ सराय संस्था तथा और इससे जुड़े रविकांत और गोरा का उल्लेख करना चाहूँगा जिसके समर्थन ने इसके काम को काफी बढ़ाया. रविशंकर श्रीवास्तव जी और करूणाकर जी का योगदान भी काफी महत्वपूर्ण रहा.मैं विशेष रूप से अमनप्रीत आलम और पराग नेमाडे को शुक्रिया देता हूँ जिन्होंने इससे जुड़े तकनीकी कार्य को काफी तत्परता से किया और इसे इस हालत में पहुँचाया कि यह इस रूप में रिलीज हो सका. यदि आप इसके अनुवाद को आगे बढ़ाने में या कुछ सुधार आदि में कोई मदद करना चाहते हैं तो आप यहाँ देखें. संगीता, जो मैथिली पर काम कर रही मुक्त स्रोत संगठन मैथिली कंप्यूटिंग रिसर्च सेंटर की देखरेख करती है, उन्हें भी मेरा शुक्रिया. उन्होंने काफी बड़े पैमाने पर स्थानीयकरण को संयोजन का काम किया है. ए. एन. सिन्हा समाज अध्ययन संस्था में फ्यूल की ओर आयोजित मानकीकरण कार्यशाला हालांकि साफी सफल रही लेकिन यहाँ हम उसके सुझाए बदलाव को पूरी तरह प्रयोग नहीं कर पाए हैं. संस्था के रजिस्ट्रार सर्वश्री ए.के.झा जी, महान भाषाविद्‌ गोविंद झा जी, रघुवीर मोची जी, रमणजी जी, मोहन भारद्वाज जी जैसे लोगों ने हमें इसमें काफी सहयोग दिया था. तो फिर हम फ्यूल का पूरी तरह से उपयोग करते हुए फेडोरा 12 में अधिक परिष्कार के साथ आएंगे.